Tuesday, March 23, 2010

A Poem Dedicated to my Sardar Bhagat singh on 23 March (Saheed Diwas)

चढ़ते सूरज को, सलामी सब की मिलती है !
गर गर्दिश में हो तारे तो कोई पानी नही देता !

जावा जिस्मो की राहो में सभी पलके बिछाते है !
कोई बेबस बुढापे को सहारा क्यों नही देता !

दौलत के धागों से बंधे है अब तो सब रिश्ते !
मुफलिस की मय्यत को, कोई कन्धा नही देता !

ना कर इन्साफ की बाते यहाँ मुजरिम ही मुंसिफ है !
बापू और भगत सिंह को कोई जीने नही देता !

अपने नयन का “नीर ” ही पीता रहा मै !
माय्कदो में अब , कोई पीने नही देता !


नरेन्द्र रावत

नरेन्द्र सिंह

नरेन्द्र रेवाड़ी

Narender Singh Rawat

1 comment:

deepika said...

Waoooo. good one sir.